378 दिन बाद ऐतिहासिक ‘किसान आंदोलन’ खत्म, ‘इस’ तारीख से खाली हो जायेंगे सभी बॉर्डर

केंद्र सरकार द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र में तीन कृषि कानून निरस्त किए जाने के बाद आंदोलित किसानों ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया है...
केंद्र सरकार द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र में तीन कृषि कानून निरस्त किए जाने के बाद आंदोलित किसानों ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया है...
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नई दिल्ली l New Delhi :

केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र में तीन कृषि कानून (Three Agriculture Laws) निरस्त किए जाने के बाद आंदोलित किसानों ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया है. किसान संगठनों का कहना है कि, वह शनिवार (11 दिसंबर) के दिल्ली (Delhi) की पांचों सीमाओं को खाली करना शुरू करेंगे.

बीते महीने शुक्रवार (19 नवंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने माफी मांगते हुए तीनों कानून वापस लेने का ऐलान किया था. हालांकि, उसके बाद भी सभी किसान वही डटे रहे. उनका कहना था कि, सरकार जब तक संसद (Parliament) में कानून वापस नहीं ले लेती वह वापस नहीं जाएंगे.

इसके बाद उन्होंने किसान आंदोलन (Farmer Agitation) के दौरान मारे गए किसानों के परिजनों को मुआवजा, दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की भी मांग रखी. साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) के मुद्दे पर कानून की मांग की. इस बाबत सरकार ने कमेटी का गठन भी किया है.

वहीं आज (गुरुवार) को किसानों ने कहा कि, हम यहां से चले जाएंगे. 11 तारीख से सारे बॉर्डर खाली कर देंगे. हम बार्डरों से जा रहे है. एमएसपी (MSP) पर सरकार से बात करेंगे. हमारी एक बैठक बुधवार (15 दिसंबर) को भी है. मिली जानकारी के अनुसार सोमवार (13 दिसंबर) को सभी किसान नेता मत्था टेकने स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) भी जा सकते हैं.

बताया गया कि, किसान पंजाब (Punjab) के सभी टोल प्लाजा (Toll Plaza) से भी हटेंगे. टोल प्लाजा पर धरने बुधवार (15 दिसम्बर) को हटाए जाएंगे ऐसे में माना जा रहा है कि, 15 तारीख के बाद पंजाब की सड़कों पर टोल टैक्स (Toll Tax) शुरू हो जाएगा.

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इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा ने बुधवार को कहा कि, उनकी लंबित मांगों को लेकर केन्द्र के संशोधित मसौदा प्रस्ताव पर आम सहमति बन गई है और आंदोलन के लिए भविष्य की रणनीति तय करने को लेकर बैठक होगी. हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चा (Samyukta Kisan Morcha (SKM) के नेताओं ने सरकार से ‘लेटरहेड’ पर औपचारिक संवाद की मांग की है.

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