पुणे l Pune :
भारत के पुणे में स्थित कंपनी सीरम इस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India, Pune) द्वारा विकसित किए जा रहे कोविशील्ड वैक्सीन (Covishield Vaccine) को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है.
शोध से पता चला है कि, कोविशील्ड टीके को दोनों खुराक लेने वालों में प्रतिरोधक क्षमता तीन महीने के अंदर ही कम होती नजर आई है इसलिए, एक रिपोर्ट के अनुसार, कोविशोल्ड की खुराक लेने वालों को जल्दही बूस्टर डोज (Covishield Vaccine booster dose) लेना पड़ सकता है.
कैसे किया गया शोध? (How was the research done?)
ब्राजील (Brazil) और स्कॉटलैंड (Scotland) से डेटा एकत्रित किया गया. एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) के दो डोज लेनेवाले स्कॉटलैंड के 20 लाख लोग और ब्राजील के 4.2 करोड़ लोगों की जानकारी पर शोध किया गया.
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शोध में क्या पाया गया ? (What was found in the research?)
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कोविशील्ड लेने के बाद 3 महीने में असर कम होने लगता है.
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कोरोना के बाद अस्पताल में भर्ती होने और दूसरी खुराक के दो सप्ताह बाद मृत्यु होने की संभावना दोगुनी थी.
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उसके बाद कोरोना होने पर अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यू होने की संभावना दूसरा डोज लेने के दो हफ्ते बाद दोगुनी हो जाती है. 4 महीने बाद यह संभावना तीन गुना बढ़ जाती है.
पुणे में सकारात्मक तस्वीर देखने को मिली (Positive picture was seen in Pune)
कुछ दिन पहले पुणे के बी. जी. सरकारी मेडिकल कॉलेज (B. G. Government Medical College, Pune) और ससून हॉस्पिटल (Sassoon Hospital, Pune) में किए गए एक शोध में सकारात्मक बात सामने आई. दोनों खुराके पूरी करने के तीन से सात महीने बाद भी स्वास्थ्य कर्मियों में लगभग 90 प्रतिशत रोग प्रतिरोधक क्षमता थी. इसलिए देखा जाए तो फिलहाल बूस्टर डोज की जरूरत नहीं है.
कोरोना के खिलाफ वैक्सीन एकमात्र हथियार है और इसका असर कम होना चिंता का विषय है, ऐसे में डर है कि. वैक्सीन लेने वाले और नहीं लेने वाले कहीं समान स्तर पर पहुंच जाए ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) की वर्तमान स्थिति की देखते हुए इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है.
: प्रोफेसर अजीज शेख, युनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग, ब्रिटेन
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