मुंबई l Mumbai :
हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती (Swami Vivekananda Jayanti) के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) मनाया जाता है. 12 जनवरी 1863 में जन्मे स्वामी विवेकानंद का नाम नरेंद्र नाथ दत्त (Narendra Nath Dutt) था.
उनके पिताजी प्रख्यात वकील थे. कॉन्वेंट में पढ़े स्वामी बचपन से ही काफी जिज्ञासु थे और उनकी इसी जिज्ञासा ने उन्हें ईश्वर को समझने व सनातन धर्म को जानने की दिशा में आगे बढ़ाया.
शिकागो (Chicago) में दिया उनका भाषण आज भी सबके बीच प्रसिद्ध है, जहां उन्होंने भारत व सनातन धर्म का इतनी संवेदनशीलता व गहराई से प्रतिनिधित्व किया था कि, हम सब आज भी गौरवांवित महसूस करते है.
स्वामीजी ने ही दुनिया को बताया था कि, असली भारत, यहां की संस्कृति और सभ्यता दरअसल क्या है. रामकृष्ण परमहंस (Ramakrishna Paramhansa) के इस प्रिय शिष्य ने लोगों को धर्म को देखने का एक नया व वैज्ञानिक नजरिया दे दिया.
उठो, जागो, चलते रहो (Get up, Wake up, Keep Going)
स्वामी विवेकानंद ने हमेशा लोगों को उर्जावान बनने की सीख दी. वो कहते थे उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये.
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ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं. वो हम ही है जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते है कि, कितना अन्धकार है.
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इस भ्रम को मिटा दो कि, तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो. खुद को कमज़ोर समझना सबसे बड़ा पाप है.
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अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है.
