सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, महाराष्ट्र में बैलगाड़ी दौड़ की दी इजाजत, 6 साल से लगाई थी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले चार साल के बाद महाराष्ट्र राज्य में सांडों की दौड़ फिर से शुरू करने की अनुमति उन्हीं शर्तों और नियमों पर दी l SC permits resumption of bull race in Maharashtra
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले चार साल के बाद महाराष्ट्र राज्य में सांडों की दौड़ फिर से शुरू करने की अनुमति उन्हीं शर्तों और नियमों पर दी l SC permits resumption of bull race in Maharashtra
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नई दिल्ली l New Delhi :

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पिछले चार साल के बाद महाराष्ट्र राज्य (Maharashtra State) में सांडों की दौड़ फिर से शुरू करने की अनुमति उन्हीं शर्तों और नियमों पर दी, जोकि कर्नाटक (Karnataka) और तमिलनाडु (Tamil Nadu) द्वारा पशु क्रूरता निवारण के संशोधित अधिनियम में उल्लेख किया गया है. (Prevention of Cruelty to Animals by Karnataka and Tamil Nadu. mentioned in the amended Act)

महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार (15 दिसंबर) को सुप्रीम कोर्ट से राज्य में सांडों की दौड़ पर प्रतिबंध हटाने का अनुरोध करते हुए कहा कि, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में इसका आयोजन किया जा रहा है. राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर (Justice A. M. Khanwilkar) और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार (Justice C. T. Ravikumar) की पीठ से कहा कि, उसे 2017 के नियमों के अनुरूप बैलगाड़ी दौड़ (Bullock Cart Races) आयोजित करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

महाराष्ट्र सरकार ने रखा था अपना पक्ष (Maharashtra government had put forth its stand)

महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी (Senior Advocate Mukul Rohatgi) ने कहा कि, बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने उन नियमों के क्रियान्वन पर रोक लगा दिया था, जिसके द्वारा राज्य सख्त नियमों के तहत बैलगाड़ी दौड़ (Bullock Cart Race) आयोजित करना चाहता था. उन्होंने पीठ से कहा कि, प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए और हमें 2017 के नियमों के अनुरूप दौड़ संचालित करने की अनुमति दी जाए.

उन्होंने कहा कि, शीर्ष अदालत संबंधित कलेक्टर की इसकी निगरानी के लिए कह सकता है जो इसमें जवाबदह हो सकते है. इस पर पीठ ने कहा कि, नियमों में पहले से ही यह प्रावधान है. रोहतगी ने कहा कि, पीठ सावधानी बरतने के बारे में कह सकती है और राज्य इसमें पूरी सावधनी बरतेगी.

2014 में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक (In 2014, the Supreme Court had banned)

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में जल्लीकट्टू (Jallikattu), बैल-दौड़ (Bullock-Racing) और बैलगाड़ी दौड़ (Bullock cart races) पर देश भर में प्रतिबंध लगा दिया था, यह स्वीकार करते हुए कि ये पीसीए अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act (PCA Act) के प्रावधानों का उल्लंघन करते है.

हालांकि, कर्नाटक और तमिलनाडु ने नियमित बैल दौड़ की अनुमति देने के लिए पीसीए अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act (PCA Act) में संशोधन किया था, जो अब भी चुनौती के अधीन हैं और 3 साल से अधिक समय से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य के संशोधनों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका 2018 से (Supreme Court (SC) की संविधान पीठ के समक्ष लंबित है. जस्टिस एएम खानविलकर (Justice A. M. Khanwilkar) की अध्यक्षता वाली SC बेंच ने कहा कि, महाराष्ट्र संशोधनों की वैधता भी कर्नाटक और तमिलनाडु के साथ संविधान पीठ द्वारा तय की जाएगी.

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